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अरसा: उत्तराखंड की पारंपरिक मिठाई और इसकी रोचक कहानी

अरसा: उत्तराखंड की पारंपरिक मिठाई और इसकी रोचक कहानी

अरसा एक पारंपरिक मिठाई है, जो उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह मिठाई चावल, गुड़ और घी से बनाई जाती है और अपने अद्वितीय स्वाद के कारण लोकप्रीय है। इसे विशेष रूप से त्योहारों, विवाह समारोहों और अन्य शुभ अवसरों पर बनाया जाता है। इसकी मिठास और सादगी इसे हर पीढ़ी में लोकप्रिय बनाए रखती है।

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डी.ए.वी. कॉलेज, देहरादून: शिक्षा, संस्कृति और समृद्धि का संगम

डी.ए.वी. कॉलेज, देहरादून: शिक्षा, संस्कृति और समृद्धि का संगम

डी.ए.वी. कॉलेज, देहरादून, उत्तराखंड राज्य का एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान है, जो भारतीय शिक्षा व्यवस्था में अपने योगदान और उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है। इस कॉलेज ने न केवल उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान की है, बल्कि अपने सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यों के लिए भी व्यापक पहचान बनाई है। डी.ए.वी. कॉलेज का इतिहास, इसकी शिक्षा प्रणाली और इसके कैंपस की सुविधाएं सभी छात्रों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत रही हैं। कॉलेज का नाम न केवल शैक्षिक उपलब्धियों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसके समाजिक कार्यों और राजनीति में भी इसकी अहम भूमिका रही है।

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योग का हमारे जीवन पर प्रभाव और उत्तराखंड का योगदान

योग का हमारे जीवन पर प्रभाव और उत्तराखंड का योगदान

योग केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि यह मानसिक, शारीरिक और आत्मिक स्वास्थ्य को संतुलित करने की एक प्राचीन भारतीय विधा है। इसका उल्लेख वेदों और उपनिषदों में भी मिलता है। योग शब्द संस्कृत के “युज” धातु से बना है, जिसका अर्थ “जोड़ना” या “मिलाना” होता है। योग का मुख्य उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करना है।

आज के व्यस्त जीवन में तनाव, डिप्रेशन, अनिद्रा, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याएँ आम हो गई हैं। ऐसे में योग एक वरदान की तरह कार्य करता है। योग केवल आसन, प्राणायाम और ध्यान तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाती है।

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रम्माण महोत्सव: सलूड़-डुंगरा गाँव की अनूठी परंपरा

रम्माण महोत्सव: सलूड़-डुंगरा गाँव की अनूठी परंपरा

उत्तराखंड के चमोली जिले के सलूड़-डुंगरा गांव में मनाया जाने वाला रम्माण महोत्सव हमारी संस्कृति, परंपरा, आस्था और लोककला का एक अनूठा संगम है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसमें हमारी समाज की एकता, नृत्य, संगीत और परंपरागत लोकनाट्य की झलक भी मिलती है।

मुझे गर्व है कि मैं सलूड़-डुंगरा गाँव से हूँ और इस अद्भुत महोत्सव का हिस्सा बनता आया हूँ। यदि आप उत्तराखंड की लोकसंस्कृति और परंपराओं को करीब से देखना चाहते हैं, तो रम्माण महोत्सव में जरूर शामिल हों।

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चिनाब रेलवे ब्रिज – दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पुल और भारत की इंजीनियरिंग का चमत्कार

चिनाब रेलवे ब्रिज – दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे पुल

भारत में जब भी इंजीनियरिंग की सबसे बड़ी उपलब्धियों की बात होती है, तो चिनाब रेलवे ब्रिज का नाम सबसे ऊपर आता है। यह न केवल भारत का सबसे ऊँचा रेलवे ब्रिज है, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी ऊँचाई और संरचनात्मक मजबूती के लिए प्रसिद्ध है। यह ब्रिज जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित है और चिनाब नदी के ऊपर 359 मीटर की ऊँचाई पर बना है, जो एफिल टॉवर से भी ऊँचा है।

चिनाब रेलवे ब्रिज का निर्माण उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (USBRL) परियोजना के तहत किया गया है। यह कश्मीर को भारत के बाकी हिस्सों से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इस ब्रिज के बनने से घाटी के लोगों को सीधा रेलवे कनेक्शन मिलेगा, जिससे आवागमन आसान होगा और पर्यटन, व्यापार एवं सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा।

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पैठाणी की होल्यार टीम – रंग, संगीत और परंपरा

गढ़वाल की होली और पैठाणी की होल्यार टीम – रंग, संगीत और परंपरा

उत्तराखंड की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामूहिक उल्लास का संगम है। खासकर गढ़वाल में होली का उत्सव अनोखा होता है, जहां ढोल-दमाऊ की थाप पर होल्यारों की टोली गांव-गांव जाकर गीत, नृत्य और ठिठोली के जरिए उत्सव को जीवंत बना देती है।

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2025 में हेमकुंट साहिब के कपाट कब खुलेंगे?

2025 में हेमकुंट साहिब के कपाट कब खुलेंगे?

हेमकुंट साहिब, उत्तराखंड का प्रसिद्ध सिख तीर्थ स्थल, हर साल सीमित अवधि के लिए खोला जाता है। गुरुद्वारा गोविंदघाट प्रशासन ने घोषणा की है कि 2025 में हेमकुंट साहिब के कपाट 25 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। गुरुद्वारा गोविंदघाट प्रशासन ने यह निर्णय एक बैठक के दौरान लिया और इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। यह खबर सुनते ही श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

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History of IIT Roorkee – A Detailed Journey of India’s Oldest Engineering College

नए साल का जश्न उत्तराखंड में: बेस्ट प्लेसेस

उत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, नए साल का जश्न मनाने के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहां के शांत पहाड़, बर्फ से ढकी चोटियां, और सुंदर झीलें इस समय को और खास बना देती हैं। अगर आप भी इस बार अपने नए साल का स्वागत खास तरीके से करना चाहते हैं, तो उत्तराखंड के ये स्थान आपके लिए परफेक्ट हैं।

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क्या आप जानते हैं भविष्य केदार मंदिर जोशीमठ में है?

उत्तराखंड के जोशीमठ में स्थित भविष्य केदार मंदिर एक अनोखा और धार्मिक महत्व वाला स्थल है। यह मंदिर भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है और इसे भविष्य में केदारनाथ का स्थान बताया गया है। अगर आप जोशीमठ घूमने की योजना बना रहे हैं, तो इस मंदिर को जरूर देखें।

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सुरकंडा देवी मंदिर- धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर

उत्तराखंड की पवित्र भूमि देवभूमि के नाम से जानी जाती है। यहां के हर कोने में धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरें छुपी हुई हैं। इन्हीं में से एक है सुरकंडा देवी मंदिर। यह मंदिर देवी सती को समर्पित है और 51 शक्तिपीठों में से एक है। टिहरी जिले में स्थित यह मंदिर अपने धार्मिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान हिमालय की ऊंचाई पर बसा है, जो इसे और भी मनोहारी बनाता है। यहां से बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाएं, हरे-भरे जंगल और खुले आसमान का दृश्य दिखाई देता है।

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