योग का हमारे जीवन पर प्रभाव और उत्तराखंड का योगदान

Mohit Bangari
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योग: हमारे जीवन में इसकी महत्ता
योग केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि यह मानसिक, शारीरिक और आत्मिक स्वास्थ्य को संतुलित करने की एक प्राचीन भारतीय विधा है। इसका उल्लेख वेदों और उपनिषदों में भी मिलता है। योग शब्द संस्कृत के “युज” धातु से बना है, जिसका अर्थ “जोड़ना” या “मिलाना” होता है। योग का मुख्य उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करना है।
आज के व्यस्त जीवन में तनाव, डिप्रेशन, अनिद्रा, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याएँ आम हो गई हैं। ऐसे में योग एक वरदान की तरह कार्य करता है। योग केवल आसन, प्राणायाम और ध्यान तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाती है।
योग का मानसिक और शारीरिक प्रभाव
1. मानसिक शांति और तनाव मुक्ति
योग करने से तनाव और चिंता कम होती है, जिससे मानसिक शांति प्राप्त होती है।
ध्यान और प्राणायाम मन को शांत करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं।
योग निद्रा से गहरी और आरामदायक नींद आती है।
मेडिटेशन से व्यक्ति का आत्म-नियंत्रण बढ़ता है और भावनात्मक स्थिरता आती है।
2. शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार
योग रक्त संचार में सुधार, मांसपेशियों को मजबूती, और बीमारियों से बचाव में सहायक होता है।
सूर्य नमस्कार और अन्य योगासन शरीर को लचीला बनाते हैं।
प्राणायाम से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और ऑक्सीजन आपूर्ति में सुधार होता है।
योग के अभ्यास से मधुमेह, ब्लड प्रेशर, और गठिया जैसी बीमारियों से बचाव होता है।
3. रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि
नियमित योग अभ्यास से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।
शरीर को बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने की शक्ति मिलती है।
योग करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर से विषैले पदार्थ निकलते हैं।
4. वजन संतुलन और ऊर्जा स्तर में वृद्धि
योग मेटाबॉलिज़्म सुधारता है और शरीर को संतुलित बनाए रखता है।
योग करने से शरीर में ताजगी और ऊर्जा का स्तर बढ़ता है।
उत्तराखंड का योग में योगदान
ऋषिकेश: योग की विश्व राजधानी
उत्तराखंड को योग की भूमि कहा जाता है। यह राज्य प्राचीन समय से ही योग और अध्यात्म का केंद्र रहा है।
ऋषिकेश को “योग की विश्व राजधानी” कहा जाता है। यह स्थान सदियों से योगियों, संतों और साधकों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ अनेक योग संस्थान और आश्रम स्थित हैं, जहाँ दुनियाभर से लोग योग सीखने आते हैं।
परमार्थ निकेतन: यह ऋषिकेश का सबसे प्रसिद्ध योग आश्रम है। यहाँ योग, ध्यान और आध्यात्मिक शिक्षाएँ दी जाती हैं।
योग महोत्सव: हर साल अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव आयोजित किया जाता है, जिसमें हजारों लोग भाग लेते हैं।
बीटल्स आश्रम: यह आश्रम योग और ध्यान के लिए प्रसिद्ध है और यहाँ विश्व प्रसिद्ध ‘बीटल्स’ संगीत समूह भी योग सीखने आया था।
उत्तराखंड और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की प्रेरणा भारत को उत्तराखंड के योग परंपरा से ही मिली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में योग दिवस मनाने का प्रस्ताव दिया था, जिसे पूरे विश्व ने स्वीकार किया।
उत्तराखंड में प्रमुख योग संस्थान
उत्तराखंड में कई योग प्रशिक्षण संस्थान हैं, जो योग को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर लोगों को लाभ पहुँचा रहे हैं। कुछ प्रमुख संस्थान हैं:
कैलाशानंद मिशन ट्रस्ट – ऋषिकेश
स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान केंद्र – हरिद्वार
शिवानंद योग वेदांत आश्रम – उत्तरकाशी
पतंजलि योगपीठ – हरिद्वार (बाबा रामदेव द्वारा संचालित)
हिमालयन योग आश्रम – ऋषिकेश
ओंकारानंद आश्रम योग विद्यालय – ऋषिकेश
बाबा रामदेव और पतंजलि योगपीठ का योगदान
बाबा रामदेव ने योग को घर-घर तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उन्होंने पतंजलि योगपीठ की स्थापना कर योग और आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर पहुँचाया।
चारधाम यात्रा और योग
उत्तराखंड के चारधाम (केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री) में तीर्थयात्री न केवल धार्मिक अनुष्ठान करते हैं, बल्कि कई लोग योग और ध्यान के लिए भी यहाँ आते हैं। हिमालय की पवित्र वादियाँ योग और ध्यान के लिए अनुकूल मानी जाती हैं।
निष्कर्ष
योग हमारे जीवन को संपूर्ण रूप से सुधारता है। यह शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति, और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। उत्तराखंड, विशेष रूप से ऋषिकेश और हरिद्वार, योग के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।
उत्तराखंड ने योग को भारत ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में फैलाने में अहम भूमिका निभाई है। यहाँ के आश्रम और योग संस्थान योग और ध्यान को आधुनिक युग में भी प्रासंगिक बनाए हुए हैं।
योग केवल एक कसरत नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। यदि हम इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें, तो हम स्वस्थ, शांत और संतुलित जीवन जी सकते हैं।
” योग अपनाएँ, जीवन को स्वस्थ और आनंदमय बनाएँ! “
Article by – Mohit Bangari
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