Mohit Bangari

I'm Mohit Bangari, a travel blogger from the Himalayas. I love to share my experiences of exploring the mountains, it's culture, and festivals. Through my articles, on mohitbangari.com, I invite you to join me on my journey to discover the beauty and charm of Himalayas.

रम्माण 2025 – सलूड़ डुंगरा की लोकआस्था का सबसे रंगीन पर्व

Ramman 2025- A unique confluence of culture faith and tradition in salud dungra village

T The Salood-Dungra village of Chamoli district in Uttarakhand is once again ready to celebrate its vibrant folk-cultural festival “Ramman 2025” in a grand way. This year, the excitement in the village for the festival is on another level.

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रम्माण 2025 – सलूड़ डुंगरा की लोकआस्था का सबसे रंगीन पर्व

रम्माण 2025: सलूड़-डुंगरा गांव में संस्कृति, श्रद्धा और परंपरा का अनोखा संगम

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सलूड़-डुंगरा गांव एक बार फिर से तैयार है अपने लोक-सांस्कृतिक महोत्सव “रम्माण 2025” को भव्य रूप में मनाने के लिए। इस वर्ष रम्माण महोत्सव को लेकर गांव में विशेष उत्साह है, क्योंकि भूमियाल देवता की स्थापना इस बार 14 अप्रैल 2025 को उनके नव निर्मित मंदिर में की गई है।

इस लेख में हम आपको रम्माण 2025 की पूरी जानकारी देंगे – इसकी तारीख, पूजा प्रक्रिया, परंपरा, गांव भ्रमण, और पूरा कार्यक्रम शेड्यूल।

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Chopta Tungnath Trek - A Complete Guide for Trekking Lovers

Chopta Tungnath Trek – A Complete Guide for Trekking Lovers

The Chopta Tungnath trek is one of the most beautiful and easy treks in the Garhwal Himalayas. It is famous for its breathtaking views, peaceful surroundings, and spiritual vibes. The trek leads you to Tungnath Temple, the highest Shiva temple in the world, and then to Chandrashila Peak, from where you can see a 360-degree view of Himalayan peaks.

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वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (Vibrant Villages Programme) – भारत के सीमावर्ती गाँवों का समग्र विकास

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (Vibrant Villages Programme) – भारत के सीमावर्ती गाँवों का समग्र विकास

भारत सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य भारत-चीन, भारत-नेपाल और भारत-पाकिस्तान जैसी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पास बसे गाँवों को विकसित करना है। यह योजना 2022-23 के केंद्रीय बजट में घोषित की गई थी।

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उत्तराखंड में स्थानों के नाम परिवर्तन: सांस्कृतिक पहचान की ओर एक कदम

उत्तराखंड में स्थानों के नाम परिवर्तन: सांस्कृतिक पहचान की ओर एक कदम

हाल ही में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के कई स्थानों के नाम बदलने की घोषणा की है। यह फैसला प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। धामी जी का कहना है कि कई स्थानों के पुराने नाम आक्रांताओं या ऐसे लोगों से जुड़े थे जिन्होंने भारतीय संस्कृति और सभ्यता पर आक्रमण किया था। अब ऐसे स्थानों को उन महापुरुषों के नाम से जोड़ा जा रहा है जिन्होंने भारत की संस्कृति, आत्मसम्मान और गौरव को बढ़ाने में योगदान दिया। उत्तराखंड सरकार ने अप्रैल 2025 में 15 स्थानों के नामों को बदलने का निर्णय लिया। इनमें से ज़्यादातर नाम उन मुग़ल या मुस्लिम शासकों से जुड़े थे जिनकी विरासत भारतीय जनमानस से मेल नहीं खाती। नए नाम भारत के ऐतिहासिक योद्धाओं, समाज सुधारकों और धार्मिक महापुरुषों के नाम पर रखे गए हैं।

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Birsingh Thakur – The Brave General of Kullu

Birsingh Thakur – The Brave General of Kullu

Birsingh Thakur was one of the most brave generals of Kullu. He played a crucial role in shaping the history of Kullu valley, defending the region from external threats and ensuring its prosperity. Known for his exceptional military leadership, strategic planning, and undying loyalty to the Kullu Kingdom, he remains a revered figure in Himachal Pradesh. His fearless attitude and deep understanding of warfare helped the Kullu Kingdom withstand various challenges during his time.

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Senior Citizen Pilgrimage to Char Dham

How to Plan a Comfortable Senior Citizen Pilgrimage to Char Dham?

The Char Dham Yatra, covering Yamunotri, Gangotri, Kedarnath, and Badrinath, is one of the most revered pilgrimages in India. While it is spiritually fulfilling, the high-altitude locations, challenging terrain, and unpredictable weather can make the journey tough, especially for senior citizens. However, with proper planning, the right facilities, and safety measures, senior citizens can comfortably complete this sacred yatra.

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अरसा: उत्तराखंड की पारंपरिक मिठाई और इसकी रोचक कहानी

अरसा: उत्तराखंड की पारंपरिक मिठाई और इसकी रोचक कहानी

अरसा एक पारंपरिक मिठाई है, जो उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह मिठाई चावल, गुड़ और घी से बनाई जाती है और अपने अद्वितीय स्वाद के कारण लोकप्रीय है। इसे विशेष रूप से त्योहारों, विवाह समारोहों और अन्य शुभ अवसरों पर बनाया जाता है। इसकी मिठास और सादगी इसे हर पीढ़ी में लोकप्रिय बनाए रखती है।

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डी.ए.वी. कॉलेज, देहरादून: शिक्षा, संस्कृति और समृद्धि का संगम

डी.ए.वी. कॉलेज, देहरादून: शिक्षा, संस्कृति और समृद्धि का संगम

डी.ए.वी. कॉलेज, देहरादून, उत्तराखंड राज्य का एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थान है, जो भारतीय शिक्षा व्यवस्था में अपने योगदान और उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है। इस कॉलेज ने न केवल उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान की है, बल्कि अपने सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यों के लिए भी व्यापक पहचान बनाई है। डी.ए.वी. कॉलेज का इतिहास, इसकी शिक्षा प्रणाली और इसके कैंपस की सुविधाएं सभी छात्रों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत रही हैं। कॉलेज का नाम न केवल शैक्षिक उपलब्धियों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसके समाजिक कार्यों और राजनीति में भी इसकी अहम भूमिका रही है।

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योग का हमारे जीवन पर प्रभाव और उत्तराखंड का योगदान

योग का हमारे जीवन पर प्रभाव और उत्तराखंड का योगदान

योग केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि यह मानसिक, शारीरिक और आत्मिक स्वास्थ्य को संतुलित करने की एक प्राचीन भारतीय विधा है। इसका उल्लेख वेदों और उपनिषदों में भी मिलता है। योग शब्द संस्कृत के “युज” धातु से बना है, जिसका अर्थ “जोड़ना” या “मिलाना” होता है। योग का मुख्य उद्देश्य शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करना है।

आज के व्यस्त जीवन में तनाव, डिप्रेशन, अनिद्रा, मोटापा और हृदय रोग जैसी समस्याएँ आम हो गई हैं। ऐसे में योग एक वरदान की तरह कार्य करता है। योग केवल आसन, प्राणायाम और ध्यान तक सीमित नहीं, बल्कि यह जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाती है।

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